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गायत्री देवी: वह महारानी, जिनकी एक झलक के लिए उमड़ता था जनसैलाब

by Aajtalk
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Maharani Gayatri Devi: वह महारानी, जिनकी एक झलक के लिए उमड़ता था जनसैलाब

जयपुर- राजस्थान की मिट्टी में कई वीर-वीरांगनाओं की कहानियाँ बसी हुई हैं। ऐसी ही एक कहानी है महारानी गायत्री देवी की। उन्हें देखने के लिए सड़कों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता था। उनका जन्म 23 मई 1919 को कूचबिहार के राजघराने में हुआ था। उनके पिता महाराजा जियान्द्र देव राय और माता महारानी इंदिरा देवी थीं। गायत्री देवी ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए और अपनी सुंदरता, शालीनता और समाजसेवा के लिए जानी गईं।

 

बचपन और शिक्षा:

गायत्री देवी का बचपन राजसी ठाठ-बाट में बीता। उनकी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने इंग्लैंड के प्रतिष्ठित स्कूलों में शिक्षा प्राप्त की। उनका रुझान खेलकूद और घुड़सवारी की तरफ भी था। इस प्रकार से वह न केवल शिक्षित थीं बल्कि शारीरिक रूप से भी सशक्त थीं।

विवाह और जयपुर की महारानी बनना:

1940 में गायत्री देवी का विवाह जयपुर के महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय से हुआ। विवाह के बाद उन्होंने जयपुर को अपना घर बना लिया। जयपुर के लोग उनकी एक झलक पाने के लिए बेसब्र रहते थे। उनकी सादगी और सुंदरता ने उन्हें लोगों के दिलों में विशेष स्थान दिलाया।

राजनीति में प्रवेश:

महारानी गायत्री देवी ने 1962 में राजनीति में कदम रखा। उन्होंने भारतीय लोकसभा चुनाव में भाग लिया और जयपुर से भारी मतों से विजयी हुईं। उनकी जीत ने उन्हें दुनिया की सबसे सुंदर सांसद का खिताब दिलाया। उन्होंने राजनीति में महिलाओं के अधिकारों के लिए काम किया और समाज में बदलाव लाने का प्रयास किया।

शिक्षा के क्षेत्र में योगदान:

गायत्री देवी ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने जयपुर में महारानी गायत्री देवी स्कूल की स्थापना की। यह स्कूल आज भी राजस्थान का एक प्रमुख शिक्षण संस्थान है। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया और इसे अपनी प्राथमिकता बनाई।

फैशन और शैली:

गायत्री देवी का फैशन सेंस भी अद्वितीय था। वह हमेशा भारतीय पारंपरिक साड़ी में दिखाई देती थीं। उनके पहनावे में एक विशेष राजसी ठाठ-बाट था। उनकी सुंदरता और फैशन सेंस ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई।

समाज सेवा और स्वास्थ्य:

महारानी गायत्री देवी ने समाज सेवा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए कई योजनाएं शुरू कीं। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी कई कदम उठाए। उनके इन कार्यों ने उन्हें लोगों के दिलों में विशेष स्थान दिलाया।

संस्कृति और परंपरा का संरक्षण:

गायत्री देवी ने जयपुर की संस्कृति और परंपराओं को संजो कर रखा। उन्होंने जयपुर के ऐतिहासिक स्थलों की देखरेख और संरक्षण के लिए भी कार्य किए। उनके प्रयासों के कारण जयपुर आज भी अपने शाही इतिहास के लिए प्रसिद्ध है।

अंतिम दिन और विरासत:

महारानी गायत्री देवी का निधन 29 जुलाई 2009 को हुआ। लेकिन उनकी यादें और उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। जयपुर की सड़कों पर आज भी उनकी कहानियाँ गूंजती हैं। राजस्थान की इस महान महारानी को देखकर सड़कों पर उमड़ने वाला हुजूम उनके प्रति लोगों के अटूट प्रेम और सम्मान का प्रतीक था।

प्रेरणा:

गायत्री देवी की कहानी यह साबित करती है कि सच्ची सुंदरता और शिष्टाचार का महत्व समय के साथ कभी कम नहीं होता। उनके जीवन से हमें सादगी, सेवा और शिष्टाचार का संदेश मिलता है। उनकी जीवनी हमें यह सिखाती है कि सच्ची महारानी वह होती है जो अपने प्रजा के दिलों पर राज करती है।

महारानी गायत्री देवी का जीवन एक प्रेरणा है। उन्होंने न केवल अपने राजसी कर्तव्यों का पालन किया बल्कि समाज सेवा, राजनीति और शिक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके द्वारा किए गए कार्य और उनके व्यक्तित्व की छाप आज भी लोगों के दिलों में बरकरार है। उनकी कहानी सच्ची सुंदरता, शालीनता और समाज सेवा का प्रतीक है, जो हमें हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

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